ल्यूकेमिया से पीड़ित थे ऋषि कपूर

भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के लिए ये हफ्ता काफी बुरा रहा है. बुधवार को इरफान खान ने दुनिया को अलविदा कहा और आज दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर के निधन की खबर आई है. बुधवार को ही ऋषि कपूर को मुंबई के एक अस्पताल में आईसीयू में भर्ती करवाया गया था और गुरुवार को वह दुनिया छोड़ कर चले गए. ऋषि कपूर 67 साल के थे और कैंसर से पीड़ित थे.

1973 में फिल्म बॉबी के साथ उन्होंने बॉलीवुड में डेब्यू किया और तब से लेकर आजतक वह हर किसी के दिलों पर राज कर रहे थे. हालांकि, 1970 में राजकपूर की ही फिल्म मेरा नाम जोकर में ऋषि कपूर एक बाल कलाकार की भूमिका में नजर आ चुके हैं.

बॉलीवुड की सबसे बड़ी फैमिली यानी कपूर खानदान में ऋषि कपूर का जन्म 4 सितंबर 1952 को हुआ था. बॉबी, द बॉडी, प्रेम रोग, 102 नॉटऑउट, मुल्क समेत सैकड़ों ऐसी फिल्में थीं जिसमें ऋषि कपूर ने शानदार काम किया था. उन्होंने हर किसी को अपना दीवाना बनाया, फिर चाहे वो रोमांस वाले रोल हो या फिर एक्शन फिल्में.

2018 में ऋषि कपूर को कैंसर हुआ था. इलाज के लिए वो अमेरिका गए थे. वहां 11 महीने रहने के बाद पिछले साल सितंबर में भारत लौटे थे.

ल्यूकेमिया क्या है?

आइए हम पहले समझते हैं कि ल्यूकेमिया क्या है – ल्यूकेमिया शरीर के रक्त बनाने वाले ऊतकों का कैंसर है, जिसमें अस्थि मज्जा के साथ-साथ Lymphatic system (लसीका तंत्र) भी शामिल है.

ल्यूकेमिया कई प्रकार के होते हैं.  ल्यूकेमिया के कुछ प्रकारों से बच्चे भी प्रभावित होते हैं, हालांकि, ज्यादातर ल्यूकेमिया वयस्कों में होता है.

संभवतः ऋषि कपूर एक्यूट मायलॉइड ल्यूकेमिया (एएमएल) से पीड़ित रहे होंगे. यह कैंसर अस्थि मज्जा में शुरू होता है, जो कुछ हड्डियों का नरम आंतरिक हिस्सा है, जहां शरीर नई रक्त कोशिकाएं बनाता है.

Cancer.org के अनुसार, अक्सर, एक्यूट मायलोइड ल्यूकेमिया (एएमएल) रक्त कोशिकाओं की माइलॉयड लाइन का कैंसर है, जो अस्थि मज्जा और रक्त में पैदा होने वाली असामान्य कोशिकाओं की तीव्र वृद्धि और सामान्य रक्त कोशिकाओं में हस्तक्षेप की विशेषता है। लक्षणों में थकान महसूस हो सकती है, सांस की तकलीफ, आसान चोट लगने और रक्तस्राव, और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है.

कपूर संभवतः ऋषि कपूर  कम तीव्रता वाले MUD (Match unrelated donor) इलाज से गुजरे होंगे.  MUD में, बाहर से स्टेम कोशिकाओं को शरीर में इंजेक्ट किया जाता है, और परिपक्व स्टेम कोशिकाओं की पहचान की जाती है और उसे  हटा दिया जाता है.

इस प्रक्रिया के लिए एक व्यक्ति को लगभग 21-15 दिनों के लिए अस्पताल में रहना पड़ता है और फिर इंतजार किया जाता है और देखा जाता है  कि शरीर उपचार के प्रति क्या प्रतिक्रिया देता है.

ऋषि कपूर को पूरी उम्मीद थी कि वो ठीक हो जाएंगे. इलाज करवाकर लौटने के बाद ऋषि कपूर ने एक इंटरव्यू दिया जहां वो अपनी सेहत को लेकर काफी खुश नज़र आए. ऋषि कपूर ने कहा था कि अब मैं कैंसर फ्री हूं . और कैमरे के सामने वापस आने के लिए तैयार हूं. मेरी बैटरी पूरी तरह से चार्ज हो चुकी है. बस मुझे ये याद रहे कि एक्टिंग कैसे करते थे.

अपने इलाज के दिनों के बारे में बात करते हुए ऋषि कपूर ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उस दौरान मुझे कई बोतल खून चढ़े। मैंने नीतू से पूछा कि इस नए खून से मेरे खून में जो एक्टिंग थी, वो भी ना चली गई हो।

अफसोस  कि हम उन्हें फिर से रुपहले परदे पर नहीं देख पायेंगे.

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