फिक्की ने सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा में बुनियादी सुधार की घोषणा को सराहा, स्वास्थ्य सेवा उद्योग को तत्काल राहत नहीं मिलने से निराश

देश के प्रमुख उद्योग संघ फिक्की ने सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा में बुनियादी सुधार के कदमों को लेकर वित्त मंत्री की घोषणा का स्वागत् किया है। दरअसल फिक्की स्वास्थ्य क्षेत्र की विभिन्न चुनौतियों के समाधान के लिए ये कदम उठाये जाने की मांग पिछले कुछ वर्षों से कर रहा था।

डॉ. आलोक राय, अध्यक्ष-फिक्की स्वास्थ्य सेवा समिति एवं अध्यक्ष, मेडिका ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के अनुसार ये ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनाने की दिशा में सराहनीय कदम हैं पर यह महत्वपूर्ण है कि ये तत्काल प्रभाव से लागू किए जाएं ताकि अगले 3-5 वर्षों में इनका लाभ दिखे। स्वास्थ्य सेवा पर सरकारी खर्च में जीडीपी का कम से कम 2.5 प्रतिशत बढ़ोतरी हो जैसा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में आश्वासन दिया गया है।

सोच-समझ कर तैयार रणनीति के तहत पूरे देश में अस्पतालों के लिए सार्वजनिक-निजी बुनियादी संरचना, सरकारी वित्त से लैब्स निर्माण, ब्लॉक स्तर पर संक्रामक रोगों से लड़ने की तैयारी पर जोर देने के साथ-साथ अनुसंधान और डिजिटल स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा देने से वास्तव में इस क्षेत्र का विकास होगा। संपूर्ण स्वास्थ्य शंृखला में बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने में ये महत्वपूर्ण साबित हैं।

टियर।। और ।।। शहरों में पीपीपी माॅडल पर अस्पताल बनाने की व्यवहार्यता में 30 प्रतिशत वित्तीय कमी (वीजीएफ) पूरा करने का कदम स्वागत योग्य है। पिछले साल सरकार ने 20 प्रतिशत वीजीएफ स्कीम की घोषणा की थी जिसके तहत काम करने के लिए अधिक भागीदार सामने नहीं आए। दरअसल यह समझना होगा कि केवल पूंजीगत खर्च के लिए वीजीएफ देना स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए व्यावहारिक नहीं होगा। इसलिए पूंजीगत व्यय और परिचालन व्यय के वित्तीयन पर भी विचार किया जाना चाहिए।

हालांकि ये सभी घोषणाएं आने वाले समय में लाभदायक होंगी जिससे देश की स्वास्थ्य सेवा क्षमता बढ़ेगी लेकिन इनसे कोविड-19 महामारी के संकट से जूझते स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को तत्काल कोई राहत नहीं मिलने वाली है।

पिछले कुछ महीनों से भारी वित्तीय और मानव संसाधन तनाव का सामना करते इस क्षेत्र के उद्योगपतियों को तत्काल राहत पैकेज की उम्मीद है। फिलहाल सरकार देश के आर्थिक विकास की बुनियादों में एक कृषि क्षेत्र के प्रति सहानुभूतिपूर्ण है लेकिन वर्तमान संकट के केंद्र ‘स्वास्थ्य क्षेत्र’ की अनदेखी हो गई है।

अस्पतालों की स्थिति के बारे में बताते हुए डॉ. आलोक राय, ने कहा कि अस्पताल जो पिछले कुछ वर्षों से आर्थिक तंगी में थे कोविड-19 की तैयारी और इलाज के नाम पर अप्रत्याशित निवेश करने को लाचार हैं; और मरीजों के आने में 60-80 प्रतिशत की गिरावट से उनकी आमदनी और गिर गई है। एक अनुमान से अस्पतालों का परिचालन से नुकसान 4500 करोड़ प्रति माह (50 प्रतिशत आमदनी और 35 प्रतिशत आॅक्युपेंसी) बताया जाता है। टियर ।। और ।।। शहरों के कई छोटे अस्पताल और नर्सिंग होम पूंजी और नकद आमदनी के अभाव में बंद पड़े हैं।

फिक्की ने सरकार से बार-बार स्वास्थ्य क्षेत्र को तत्काल राहत देने की कुछ सिफारिशें की है। ताकि अस्पतालों को इन मुश्किलों से बाहर निकलने में मदद मिले। यह आज भी ऐसी कुछ सिफारिशें करता है जैसे कि:

◆ लघु अवधि के लिए बिना ब्याज / रियायती ब्याज दर पर नकद उपलब्ध कराना ताकि परिचालन घाटा कम हो; नकद की कमी दूर करने के लिए लगभग 14,000 -24,000 करोड़ रुपयों का प्रावधान।

◆ नई आयकर व्यवस्था अपनाते हुए जो एमएटी क्रेटिड पहले नहीं लिया गया उसका लाभ

◆ अप्रत्यक्ष कर में राहत / छूट / माफी जैसे कि निर्धारित अवधि में खरीद पर दिए गए अयोग्य जीएसटी क्रेडिट के बराबर पुनर्खरीद राशि का प्रावधान।

◆ कोविड के मरीजों के उपचार के लिए आवश्यक दवाओं, उपभोग सामग्रियों और उपकरणों पर सीमा शुल्क/ जीएसटी की छूट

◆ सभी अनिवार्य चिकित्सा उपकरणों पर स्वास्थ्य-उपकर माफ या छूट

◆ विदेशी मरीजों का आना बिल्कुल बंद होने का ध्यान रखते हुए सेवा निर्यात संबंधी दायित्व पूरे करने के लिए ईपीसीजी योजना के तहत निर्धारित 3 साल की अवधि का विस्तार करना

◆ अस्पतालों पर लागू बिजली खपत की वर्तमान वाणिज्यिक दरों में कम से कम 50 प्रतिशत की छूट ताकि स्वास्थ्य सेवा बनी रहे।

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